:
Breaking News

खरीफ सीजन की तैयारी शुरू: मक्का, धान, तिल और सब्जी फसलों पर कृषि वैज्ञानिकों की अहम सलाह जारी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ कृषि वैज्ञानिकों ने मक्का, धान, तिल और सब्जी फसलों की खेती को लेकर किसानों को समय पर बोआई, उर्वरक प्रबंधन और उन्नत किस्मों के चयन की सलाह दी है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही उत्तर बिहार में खेती-किसानी की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जून माह में मानसून की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए मक्का, धान, तिल और सब्जी फसलों की खेती को लेकर विस्तृत सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसान समय पर खेत की तैयारी, उन्नत बीज चयन और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाते हैं तो खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

इस समय खेतों में नमी और मौसम दोनों ही बोआई के लिए अनुकूल माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को देरी नहीं करनी चाहिए और मानसून का अधिकतम लाभ उठाने के लिए तैयारियों को तुरंत शुरू कर देना चाहिए। कृषि विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों ने किसानों को उन्नत तकनीक अपनाने और पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को जोड़ने की सलाह दी है।

मक्का की खेती को लेकर वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का खरीफ सीजन की एक महत्वपूर्ण फसल है, जिसकी खेती के लिए खेत की अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 100 से 150 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही संतुलित मात्रा में 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों ने उत्तर बिहार के किसानों को विशेष रूप से शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, शक्तिमान-6 और राजेन्द्र शंकर मक्का-3 जैसी उन्नत हाइब्रिड किस्मों की खेती करने की सिफारिश की है। उनका कहना है कि इन किस्मों से बेहतर उपज प्राप्त होती है और रोगों का प्रभाव भी कम रहता है।

धान की नर्सरी को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश

धान खरीफ की सबसे प्रमुख फसल है और इसके लिए नर्सरी तैयार करने का यह सही समय माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से 25 जून तक धान की नर्सरी तैयार करने की अपील की है ताकि समय पर रोपाई की जा सके।

मध्यम अवधि वाली किस्मों में संतोष, सीता, सरोज, सहभागी धान और राजेन्द्र श्वेता को उपयुक्त बताया गया है। वहीं सुगंधित धान की किस्मों में राजेन्द्र सुवासिनी, राजेन्द्र कस्तूरी और राजेन्द्र नगवती जैसी किस्मों को बेहतर विकल्प के रूप में सुझाया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सही किस्मों का चयन उत्पादन क्षमता को काफी हद तक बढ़ा सकता है।

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा की सलाह

विशेषज्ञों ने धान रोपाई से पहले खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा जैसी हरी खाद की फसल को अपनाने की सलाह दी है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बीज का उपयोग किया जा सकता है।

ढैंचा की फसल लगभग 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है, जिसे खेत में पलट देने से मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है। इससे प्राकृतिक रूप से 70 से 75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन की उपलब्धता होती है, जो फसल की वृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी है।

तिल की खेती में सावधानी और तकनीक

तिल की खेती मध्य जून से मध्य जुलाई तक की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे जल निकासी वाली ऊंची भूमि का चयन करें, ताकि बारिश के समय फसल को नुकसान न हो।

बीज उपचार के लिए प्रति किलोग्राम बीज में दो ग्राम थीरम का उपयोग करने की अनुशंसा की गई है। उन्नत किस्मों में कृष्णा, कालिका और कांके सफेद को बेहतर बताया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सही तकनीक अपनाने से तिल की खेती में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों हासिल किए जा सकते हैं।

सब्जी और प्याज की नर्सरी पर विशेष ध्यान

खरीफ सीजन में सब्जी उत्पादन को लेकर भी वैज्ञानिकों ने किसानों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मिर्च, कद्दू, खीरा, नेनुआ और लौकी जैसी सब्जियों में नियमित निकाई-गुड़ाई और कीट प्रबंधन करने की सलाह दी गई है ताकि फसल को रोगों से बचाया जा सके।

इसके साथ ही खरीफ सब्जियों की बोआई शुरू करने और प्याज की नर्सरी तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। एग्री फाउंड डार्क रेड किस्म के प्याज को उपयुक्त बताया गया है। बारिश से नर्सरी को सुरक्षित रखने के लिए उठी हुई क्यारियों और पॉलीथीन शेड का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जिससे पौधों को अधिक नमी और जलभराव से बचाया जा सके।

किसानों के लिए बड़ा संदेश

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान समय पर सही तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक सलाह को अपनाते हैं तो खरीफ सीजन में उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है। यह समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि मानसून का सही उपयोग ही उनकी आमदनी और फसल की गुणवत्ता तय करेगा।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *